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अनूठा डॉक्टर

जर्मनी के सम्राट जॉर्ज जोसेफ प्रजा का दुख-दर्द जानने के लिए वेश बदलकर घूमा करते थे। एक दिन वह एक गली से गुजर रहे थे कि एक फटेहाल युवक ने उनका रास्ता रोककर कहा, 'मेरी मां कुछ समय से बीमार है। मैंने उसे कई डॉक्टरों को दिखाया, कोई भी उसके रोग को पहचान नहीं पाया। उसका शरीर जर्जर हो चुका है। यदि मुझे कुछ रुपये मिल जाएं तो मैं अंतिम बार उसका इलाज करना चाहता हूं। क्या आप मेरी मदद कर सकेंगे?' सम्राट ने जेब से रुपये निकाले और उसे देते हुए कहा, 'तुम डॉक्टर को बुलाकर लाओ। मैं तुम्हारी कुछ और भी मदद करने की कोशिश करूंगा। तुम मुझे अपना पता बता दो।'

जॉर्ज जोसेफ तुरंत उस व्यक्ति के घर पहुंचे। उन्होंने देखा कि एक वृद्धा चारपाई पर लेटी हुई है। एक बालक पास बैठा रो रहा है। सम्राट ने अपने को डॉक्टर बताकर महिला से उसकी बीमारी के बारे में पूछा। महिला ने कहा, 'मेरे पति ही घर का खर्च चलाते थे। हाल में उनकी मृत्यु हो गई। कमाने वाला कोई नहीं रहा।

मेरे मरने के बाद मेरे अनाथ बच्चों का क्या होगा, यही चिंता मुझे बीमार बनाए हुए है।' सम्राट ने कागज पर कुछ लिखा और वृद्धा को देते हुए कहा,'इस पर मैंने दवा लिख दी है। अपने बेटे को भेजकर मंगा लेना।' यह कहकर वह चले गए।

कुछ देर बाद वृद्धा का बेटा डॉक्टर को लेकर आया। वृद्धा ने उससे कहा, 'बेटा, अभी थोड़ी देर पहले एक डॉक्टर आया था। वह पर्चे पर कोई दवा लिखकर गया है।' बेटे के साथ आए डॉक्टर ने उसे देखने के बाद कहा, 'माता जी, आपके पास एक अनूठा डॉक्टर आया था। वह आपकी बीमारी का स्थायी इलाज कर गया है। वह कोई साधारण डॉक्टर नहीं था, वह तो हमारे देश का राजा था।' सम्राट जोसेफ ने उस कागज पर लिखा था कि वृद्धा तथा इसके परिवार को राजकोष से नियमित धन देने की व्यवस्था की जाए।