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बालिका की सीख

अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन काफी बदसूरत थे लेकिन अपने गुणों के कारण वह देश में अत्यंत लोकप्रिय थे। जनता उन्हें बेहद प्यार करती थी। एक बार एक बालिका ने किसी से लिंकन की प्रशंसा सुनी, तो उसके मन में उनसे मिलने की उत्सुकता जागी। उसने अपने पिता से कहा, 'पिताजी, मैं राष्ट्रपति को देखना चाहती हूं क्योंकि सभी उनकी बहुत प्रशंसा करते हैं। मैं देखना चाहती हूं कि वह कैसे हैं।' पिता ने कहा, 'बेटी, वह अच्छे नहीं हैं। वह बहुत काले और भद्दे हैं। उन्हें देखकर तुम डर सकती हो। इसलिए मैं तुम्हें उनके पास लेकर नहीं जाना चाहता।' लेकिन लड़की अड़ गई। वह बार-बार लिंकन से मिलने की जिद करने लगी। पिता ने टालने की बहुत कोशिश की, तरह-तरह का बहाना बनाया लेकिन अपनी बेटी की जिद के आगे झुकना ही पड़ा। पिता को उसे लिंकन के पास ले जाना पड़ा।

जब वह राष्ट्रपति आवास पर पहुंचे तो लिंकन अपने काम में व्यस्त थे फिर भी उन्होंने बाप-बेटी का भव्य स्वागत किया और आने का कारण पूछा। उस व्यक्ति ने कहा, 'मेरी बेटी आपकी बहुत बड़ी प्रशंसक है। वह आपसे मिलने के लिए बहुत हठ कर रही थी। इसलिए मैं उसे आपके पास लेकर आया हूं ताकि वह आपको देख सके।' इतना सुनते ही लिंकन उठ खड़े हुए और उस बालिका को अपनी गोद में उठाकर अपने छोटे से बगीचे में घूमने लगे। उन्होंने उस बालिका से हंस-हंस कर ढेर सारी बातें की और उसका मनोरंजन किया।

बालिका को खुश देखकर लिंकन भी बेहद खुश हो रहे थे। जब वे लौटकर जाने लगे तो बालिका ने कहा, 'पिताजी, हमारे राष्ट्रपति तो बहुत सुंदर हैं। बहुत प्यारे हैं। आप तो कहते थे कि वे भद्दे हैं, बदसूरत हैं, मैं उन्हें देखकर डर जाऊंगी। मगर मुझे तो जरा भी डर नहीं लगा। मुझे तो उनके साथ बड़ा मजा आया।' यह सुनकर पिता ने लज्जा से नजरें झुका लीं। बालिका ने उसे बहुत बड़ी सीख दी थी।