गौतम बुद्ध ने 29 वर्ष की आयु में दु:खों से मुक्ति प्राप्त करने का उपाय ढूंढने के लिए अपने परिवार और गृहस्थ जीवन को छोड़ दिया। निरंतर चिंतन-मनन के बाद 35 वर्ष की आयु में उन्होंने इसका रास्ता खोज भी लिया। 45 वर्ष तक उन्होंने लगातार अपने विचारों का प्रचार किया। जब उनका अंत समय आया, वह एक वृक्ष के नीचे लेट गए और मृत्यु की प्रतीक्षा करने लगे।
उस समय उनका केवल एक ही शिष्य उनके पास था, आनंद। आनंद ही लंबे समय से बुद्ध की सेवा कर रहा था। आनंद ने सोचा कि बुद्ध का अंत समय निकट है। अगर यह बात पास के गांव में रहने वाले बुद्ध के शिष्यों को न बताई जाए तो वे नाराज होंगे। आनंद के यह बताने पर लोग बुद्ध का दर्शन करने उस वृक्ष के पास पहुंचने लगे। आसपास के इलाकों में इस बात की चर्चा फैल गई। एक व्यक्ति अपनी जिज्ञासा के समाधान के लिए काफी उत्सुक था।
वह भोलाभाला ग्रामीण था और दुनियादारी को ढंग से नहीं जानता था, फिर भी उसके मन में एक जिज्ञासा थी, जिसे लेकर वह परेशान था। बुद्ध ने उसे अपने पास बुलाया। उस ग्रामीण ने हाथ जोड़ कर बुद्ध से जीते जी मुक्ति पाने का मार्ग बताने की प्रार्थना की। बुद्ध ने ग्रामीण से कहा, 'जीते जी जन्म-मरण से मुक्ति प्राप्त करना चाहते हो तो जीवन में तीन बातें याद रखो और इन बातों पर अमल भी करो।'
सब लोग ध्यान से सुनने लगे। बुद्ध ने कहा,' पहली बात है पापों से, जहां तक संभव हो, बचो। दूसरी बात है जीवन में जितने भी पुण्य कर्म कर सकते हो, करो एवं तीसरी बात है अपना मन, चित्त निर्मल रखो।' ये शब्द कहते ही बुद्ध ने अपने प्राण त्याग दिए। बुद्ध की इन तीन शिक्षाओं को अपनाकर ग्रामीणों ने जीते जी मुक्ति का मार्ग पाया। ये तीन शिक्षाएं मानवता के लिए अमूल्य देन हैं।
उस समय उनका केवल एक ही शिष्य उनके पास था, आनंद। आनंद ही लंबे समय से बुद्ध की सेवा कर रहा था। आनंद ने सोचा कि बुद्ध का अंत समय निकट है। अगर यह बात पास के गांव में रहने वाले बुद्ध के शिष्यों को न बताई जाए तो वे नाराज होंगे। आनंद के यह बताने पर लोग बुद्ध का दर्शन करने उस वृक्ष के पास पहुंचने लगे। आसपास के इलाकों में इस बात की चर्चा फैल गई। एक व्यक्ति अपनी जिज्ञासा के समाधान के लिए काफी उत्सुक था।
वह भोलाभाला ग्रामीण था और दुनियादारी को ढंग से नहीं जानता था, फिर भी उसके मन में एक जिज्ञासा थी, जिसे लेकर वह परेशान था। बुद्ध ने उसे अपने पास बुलाया। उस ग्रामीण ने हाथ जोड़ कर बुद्ध से जीते जी मुक्ति पाने का मार्ग बताने की प्रार्थना की। बुद्ध ने ग्रामीण से कहा, 'जीते जी जन्म-मरण से मुक्ति प्राप्त करना चाहते हो तो जीवन में तीन बातें याद रखो और इन बातों पर अमल भी करो।'
सब लोग ध्यान से सुनने लगे। बुद्ध ने कहा,' पहली बात है पापों से, जहां तक संभव हो, बचो। दूसरी बात है जीवन में जितने भी पुण्य कर्म कर सकते हो, करो एवं तीसरी बात है अपना मन, चित्त निर्मल रखो।' ये शब्द कहते ही बुद्ध ने अपने प्राण त्याग दिए। बुद्ध की इन तीन शिक्षाओं को अपनाकर ग्रामीणों ने जीते जी मुक्ति का मार्ग पाया। ये तीन शिक्षाएं मानवता के लिए अमूल्य देन हैं।