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किसानों का संकल्प

किसी कारणवश इंद्र क्रुद्ध हो गए। उन्होंने घोषणा कर दी,'अब बारह वर्ष तक बरसात नहीं होगी।' घोषणा सुन जनता मायूस हो गई। फिर भी बारिश के मौसम में किसान हल और बैलों को लेकर खेतों में गए, भूमि को साफ किया, हल जोते। इंद्र समझ नहीं सके कि उनकी स्पष्ट घोषणा के बावजूद ये खेती क्यों कर रहे हैं। वेश बदलकर इंद्र नीचे आए। किसान इकट्ठा हो गए। इंद्र ने पूछा, 'क्या तुमने इंद्र की यह घोषणा नहीं सुनी कि बारह वर्ष तक बारिश नहीं होगी?' लोगों ने कहा, 'हां, सुनी है।' इंद्र बोले, 'फिर यह व्यर्थ का प्रयत्न क्यों कर रहे हो? क्यों भूमि को साफ कर रहे हो? क्यों बैलों को कष्ट दे रहे हो? क्यों बुआई की तैयारी कर रहे हो? वर्षा तो होगी नहीं।'

किसान बोले, 'वर्षा हो या नहीं, हम तो भूमि की सफाई करेंगे और हल भी चलाएंगे। यदि हम यह प्रयास छोड़ दें तो हमारी भावी पीढ़ी बिल्कुल बेकार हो जाएगी और कृषि करना भूल जाएगी। फिर बारह वर्ष के बाद हमारे बच्चे क्या खाएंगे। हम यह कार्य प्रतिवर्ष बराबर करते रहेंगे। मेघ बरसें या नहीं बरसें, यह उनकी इच्छा है, मगर हम अपना धंधा नहीं छोड़ेंगे, कृषि करते चले जाएंगे। ऐसा करते-करते एक दिन अवश्य बारिश भी होगी और खेती भी।' किसानों के दृढ़ संकल्प के सामने इंद्र भी झुक गए।