दुनिया बदल रही है। कितनी तेजी से बदल रही है, जब तक यह सोचकर कमरे से बाहर निकलता हूं कुछ और बदल चुका होता है। मामला कुछ ऐसा ही हो जाता है जैसे जस्ट मैरिड लिखी हुई कार दूल्हा- दुल्हन को लेकर जाए और सीधे तलाक वाले वकील के घर पर जाकर रुके।
मुझे ईश्वर से शिकायत है कि उसने कुछ नहीं बदला- सूरज, हवा, पानी वगैरह। खैर मुझे सबसे ज्यादा प्रॉब्लम इन चीजों से न होकर, आदमी के ढांचे से है। इंसानी मॉडल जैसा हजारों बरस पहले था, आज भी वैसा ही है, सिर्फ पूंछ गायब हो गई है। गॉड! इट्स नॉट फेयर। अब समय आ गया है कि इन्सान का ढांचा भी बदले। मेरे कुछ सुझाव हैं कि आदमी में बदलाव कैसा होना चाहिए।
ईश्वर को मालूम होना चाहिए कि आज दुनिया की सबसे बड़ी समस्या बिजली, पानी या प्रदूषण की नहीं है। लादेन और लिट्टे की भी नहीं है। सबसे बड़ी समस्या है डैंड्रफ की। आदमी का मॉडल ऐसा होना चाहिए कि डैंड्रफ की गुंजायश ही न रहे। पूरा सिर डैंड्रफ प्रूफ। महिलाओं के बाल उनकी इच्छा से ही बढ़ें और चमकीले हों। मुझे मालूम है कि जब सबके बाल ऐसे होंगे तो गंजापन स्टेटस सिंबल बन जाएगा, फिर भी आप चेंज कर ही दें। साथ ही जूंओं को भी कहीं और शिफ्ट कर दें, कम से कम बालों में तो न रहें।
ईश्वर को इंसान का नया मॉडल बनाते समय इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए अब इंसान के सिर के पीछे एक तीसरी आंख भी अवश्य रहे, कॉलर से थोड़ा सा ऊपर। आजकल पीछे देखते रहना बहुत जरूरी है दुर्घटनाओं से बचने के लिए। और आगे की आंख खराब होने पर पीछे वाली आंख स्पेयर पार्ट का काम भी कर सकती है।
नाक की जरूरत सांस के लिए ज्यादा है या चश्मा टिकाने के लिए, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है। अगर नाक चश्मे के लिए ही है तो इस सुरंगयुक्त फ्लाईओवर को चेहरे से हटा दें, तो अच्छा लगेगा। अगर नाक सांस लेने के लिए है, तो कम से कम गॉड जी इस पर एक एयर फिल्टर तो लगा दें।
मूछें नाक पर अंडरलाइन की तरह हैं। इन्हें हटाया जा सकता है। बिना मूछों के भी लोग कपिलदेव को ऐश्वर्या राय तो नहीं समझेंगे न। दांत वाइट की जगह कलर्ड ही होने चाहिए, पर ध्यान रहे कि रंग पक्का हो, ब्रश करते समय उतरे नहीं। अच्छा हो कि हर दांत का रंग अलग- अलग हो।
सुझाव यह भी है कि दांत 30 बरस की उम्र में टूट कर फिर से नए आएं, नए रंगों के साथ। इससे लाइफ में चार्म बना रहेगा। दाढ़ी का रंग भी दांतों के रंग से मैचिंग का ही होना चाहिए। मल्टीकलर होने पर और बेहतर। वैसे मर्द बहुत दुखी हो चुके हैं रोज शेव करते- करते।
दिल का किस्सा सबसे पेचीदा है। सोचते सब दिमाग से हैं, और बदनाम दिल होता है। दरअसल दिल का काम सिर्फ इतना है कि खून साफ करे, न कि सबसे इंसाफ करे। इसलिए यह पूरा शरीर ऐसा ढक्कनदार होना चाहिए कि जिसे खोलकर पूरी साफ सफाई की जा सके, नो सर्जरी।
आदमी हर चीज के लिए तो दो- दो हाथ नहीं कर सकता। वैसे अब दो हाथ होना पर्याप्त नहीं है। कम से कम एक हाथ तो एक्स्ट्रा चाहिए, मोबाइल फोन के लिए। या फिर शरीर में एक जेबनुमा चीज लगा दो, जिसमें मोबाइल रखा या टांगा जा सके। वहां से कान तक इन्टरनल वायरिंग हो जिससे बिना हाथ का उपयोग किए आदमी मोबाइल पर बात कर सके। वैसे इस जेब वाले सुझाव में समस्या ये है कि मोबाइल छिप जाएगा। उसका रेट, फीचर्स, लुक -सब छिप पाएगा। मोबाइल अगर इम्प्रेशन के काम न आया तो क्या फायदा। सो पहले वाला सुझाव ही मान लें। एक हाथ एक्स्ट्रा दे दें। फाइनल!
वैसे तो गॉड जी! मैं आपको और भी कई सुझाव दे सकता हूं, बट यू नो, मुझे बिना मांगे सलाह देने की आदत नहीं है। बेसिकली इट्स योअर जॉब, जस्ट डू इट!