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ज़रा गौर कीजिये!

कैसी विडंबना है की आज राजनितिक क्षितिज पर कोई भी ऐसा राष्ट्रिय दल नही जो राष्ट्रहित के मुदों पर राष्ट्रिय हस्त्षेप कर सके तथा राष्ट्र कि राजनीती को सकारात्मक दिशा दे सके तो सोचिये कि देश को नए राजनितिक विकल्प कि ज़रूरत है कि नही? जब देश में सत्ता पक्ष एवं विपक्ष में कोई भी सक्षम दल नही है तो देश में समय समय पर संप्रदायवाद, जातिवाद, शेत्रवाद और आतंकवाद जैसे भस्मासुर तो अपना तांडव करेंगे ही।