Search This Blog

सिद्धांत के विरुद्ध

यह घटना उस समय की है जब लाल बहादुर शास्त्री देश के गृह मंत्री थे। वह अपनी सादगी, सज्जनता, साफगोई और इमानदारी के लिए देश भर में जाने जाते थे। वह किसी भी कार्य के लिए सिफारिश के सख्त विरोधी थे। अपने इस गुण के कारण कई बार उन्हें लोगों के विरोध का भी सामना करना पड़ता था। एक दिन वह अपने कार्यालय में व्यस्त थे कि तभी उनके सचिव ने उनके एक मित्र के नाम की पर्ची भेजी। शास्त्री जी ने तुरंत अपने मित्र को मिलने के लिए अपने पास बुला लिया। आवभगत के बाद शास्त्री जी ने मित्र से आने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि उनके पुत्र ने उत्तर प्रदेश पुलिस में दारोगा पद के लिए आवेदन किया है। यदि शास्त्री जी भर्ती अधिकारी से सिफारिश कर दें तो उनके पुत्र को यह पद मिल सकता है।
शास्त्री जी ने यह सुनने के बाद अपने मित्र से मुखातिब होते हुए कहा, 'आप मुझसे मिलने आए इसका मुझे अपार हर्ष है जिसे मैं शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता। पर आपके पुत्र की लंबाई भर्ती मापदंडों के अनुसार काफी कम है। इसलिए उसे यह पद नहीं मिल सकता। इसकी सिफारिश करना मेरे सिद्धांतों के विरुद्ध जाना होगा।' मित्र ने हैरानी भरे शब्दों में कहा, 'शास्त्री जी, यह आप क्या कह रहे हैं? आपकी लंबाई भी काफी कम है। फिर अगर आप गृह मंत्री बन सकते हैं तो जरा सी लंबाई कम होने के कारण मेरा पुत्र दारोगा क्यों नहीं बन सकता?' इस पर शास्त्री जी बोले, 'मित्र, छोटा कद होने पर मैं गृह मंत्री अवश्य बन गया हूं पर इसके बावजूद दारोगा तो मैं चाहकर भी नहीं बन सकता। आपका बेटा भी गृह मंत्री बनना चाहे तो जरूर बन सकता है। दारोगा बनने के लिए निश्चित लंबाई जरूरी है, गृह मंत्री बनने के लिए नहीं।' शास्त्री जी की यह बात सुनकर उनके मित्र निरुत्तर हो गए।