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किसान का संदेश!

एक राजा अपने सभी कार्य राज ज्योतिषी की सलाह पर करता था। इसका परिणाम यह हुआ कि राज्य में अराजकता फैल गई। कोई काम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा था। लोग परेशान थे लेकिन राजा जनता की बात नहीं सुनता था और ज्योतिषी की सलाह पर आंख मूंदकर विश्वास करता था।
राज्य की समस्या का निराकरण करने के लिए एक बार वह ज्योतिषी की सलाह पर एक संत से मिलने जा रहा था। साथ में ज्योतिषी भी था। रास्ते में एक किसान मिला, जो हल- बैल के साथ खेत जोतने के लिए जा रहा था। ज्योतिषी ने उससे कड़क कर कहा, 'आज तुम इस दिशा में काम करने क्यों जा रहे हो। आज तो दिशा शूल है। इस तरफ आज जो भी काम करोगे, उसका परिणाम उलटा होगा और लाभ के स्थान पर नुकसान होगा। लौट जाओ।'
किसान बोला, 'ज्योतिषी महाराज, मेरे खेत इसी दिशा में हैं। मैं साल भर हर रोज इसी दिशा में काम करने जाता हूं। इसी परिश्रम के कारण मैं आराम से अपना जीवन व्यतीत कर रहा हूं। मुझे आज तक कोई नुकसान नहीं हुआ। मेरे खेतों की पैदावार सबसे अच्छी होती है। यदि मैं आप की सलाह पर काम करने लगूं तो भूखों मर जाऊंगा। खेत बंजर हो जाएंगे।'
ज्योतिषी ने अपनी झेंप मिटाते हुए कहा, 'अपना हाथ तो दिखाओ कि तुम्हारे भाग्य की रेखाएं क्या कहती हैं।' किसान बोला, 'किसी के आगे हाथ वह फैलाता है जो कामचोर होता है। जिसको अपने बाहुबल और मेहनत पर भरोसा नहीं होता। मैं मेहनत करके अपना भाग्य खुद बनाता हूं। मैं आप के सामने हाथ क्यों फैलाऊं।' किसान हल-बैल लेकर आगे चला गया। किसान की बात सुन कर राजा बोला, 'ज्योतिषी जी, अब मुझे आप की सलाह की जरूरत नहीं है और न ही संत के पास जाना है।' वह वहीं से लौट आया। उसके बाद वह अपने विवेक से निर्णय करने लगा। राज्य में खुशहाली आ गई।